PG Crisis UP: गैस सिलेंडर की लाइन में खड़े 75 वर्षीय बुजुर्ग की मौत

अजमल शाह
अजमल शाह

फर्रुखाबाद की एक साधारण सुबह अचानक एक दर्दनाक खबर में बदल गई। शहर के लाल सराय इलाके में स्थित गैस एजेंसी के बाहर रोज़ की तरह लंबी कतार लगी थी। लोग हाथ में बुकिंग स्लिप लिए अपने नंबर का इंतजार कर रहे थे।

उसी कतार में 75 वर्षीय मुख्तार अंसारी भी खड़े थे। घर में गैस खत्म हो चुकी थी, इसलिए सुबह करीब साढ़े छह बजे वे सिलेंडर लेने खुद एजेंसी पहुंच गए।

लेकिन किसे पता था कि सिलेंडर लेने आए इस बुजुर्ग की वापसी घर तक नहीं होगी।

अचानक बिगड़ी तबीयत, लाइन में ही गिर पड़े

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लाइन में खड़े-खड़े अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। कुछ ही सेकंड में वे बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें संभाला और सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की।

किसी ने पानी दिया, किसी ने हार्ट पंप किया, तो किसी ने एम्बुलेंस के लिए फोन मिलाया। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

परिवार का दर्द: “घर में गैस खत्म थी”

परिजनों का कहना है कि मुख्तार अंसारी पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। इसके बावजूद वे सुबह खुद लाइन में इसलिए लगे क्योंकि घर में खाना बनाने के लिए गैस बिल्कुल खत्म हो चुकी थी।

परिवार के मुताबिक, पहले कभी ऐसा संकट नहीं देखा गया था। बुकिंग के बाद भी बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे थे और सिलेंडर मिलने में देरी हो रही थी।

शहर में बढ़ती गैस किल्लत

फर्रुखाबाद ही नहीं, उत्तर प्रदेश के कई शहरों से इन दिनों गैस किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं। लोगों का आरोप है कि बुकिंग होने के बावजूद सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा। कई जगहों पर एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि यह स्थिति पिछले कुछ हफ्तों में ज्यादा बिगड़ी है।

स्थानीय लोगों का गुस्सा

घटना के बाद इलाके में आक्रोश भी देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस वितरण की पुरानी व्यवस्था फिर से लागू की जाए ताकि लोगों को घंटों लाइन में खड़ा न रहना पड़े।

लोगों का कहना है कि अगर समय पर सिलेंडर मिल जाता, तो शायद एक बुजुर्ग की जान नहीं जाती।

एक सवाल जो पीछे रह गया

फर्रुखाबाद की यह घटना सिर्फ एक मौत की खबर नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल भी है जिसमें रोजमर्रा की जरूरत—एक गैस सिलेंडर—के लिए भी लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।

और कभी-कभी…इन कतारों से कोई घर नहीं लौटता।

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